Medically reviewed by Dr. Prem Ratan Degawat, MD, DM (Cardiology)
Senior Interventional Cardiologist · Associate Director, TAVR & Structural Heart Disease Program, Eternal Hospital, Jaipur
Last updated on Sep 10, 2026 · View LinkedIn profile
अगर आपकी echo report में “severe aortic stenosis” लिखा है, तो इसका मतलब है कि heart का aortic valve इतना सिकुड़ चुका है कि उसे बदलने पर विचार शुरू कर देना चाहिए। Report में तीन आंकड़े यह तय करते हैं: mean gradient, aortic valve area और peak velocity। नीचे हर आंकड़े का मतलब, guideline में तय सीमा के साथ दिया गया है।
एक बात साफ़ रहनी चाहिए। Report सिर्फ़ बीमारी की गंभीरता बताती है, इलाज नहीं। इलाज का फ़ैसला आंकड़ों और मरीज़ के लक्षणों, दोनों को देखकर होता है।
| गंभीरता | Peak velocity (Vmax) | Mean gradient | Aortic valve area |
|---|---|---|---|
| Mild | 2.0 से 2.9 m/s | 20 mmHg से कम | 1.5 cm² से ज़्यादा |
| Moderate | 3.0 से 3.9 m/s | 20 से 39 mmHg | 1.0 से 1.5 cm² |
| Severe | 4.0 m/s या उससे ऊपर | 40 mmHg या उससे ऊपर | 1.0 cm² या उससे कम |
ये सीमाएं 2020 ACC/AHA valvular heart disease guideline से ली गई हैं। European guideline में mild की सीमा थोड़ी अलग है, इसलिए अलग-अलग labs की report में किनारे पर हल्का अंतर दिख सकता है। बीच की दोनों श्रेणियों पर दोनों guidelines एकमत हैं।
Echo Report में क्या देखा जाता है
Echo ध्वनि तरंगों पर आधारित जांच है। इसमें न विकिरण होता है और न कोई चीरा लगता है।
यह जांच valve से गुजरने वाले खून की रफ़्तार नापती है। Valve जितना सिकुड़ता है, खून को उतने ही तंग रास्ते से निकलना पड़ता है और रफ़्तार बढ़ जाती है। इसी रफ़्तार के आधार पर report के बाकी आंकड़े निकाले जाते हैं।
इसलिए report में लिखा हर आंकड़ा आखिर में दो ही बातें बताता है। valve कितना कम खुल रहा है, और heart को उसमें से खून भेजने के लिए कितना ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ रहा है।
Report की चार लाइनें जो सबसे अहम हैं
Peak velocity (Vmax). खून की सबसे तेज़ रफ़्तार, m/s में। Valve जितना सिकुड़ेगा, यह उतना बढ़ेगा। 4.0 m/s इसकी severe सीमा है।
Mean gradient. Valve के दोनों तरफ़ दबाव का औसत अंतर, mmHg में। मेरे अनुभव में यह सबसे भरोसेमंद आंकड़ा है, क्योंकि यह पूरी धड़कन का औसत लेता है, सिर्फ़ एक ऊंचे पल का नहीं। 40 mmHg या उससे ऊपर severe माना जाता है।
Aortic valve area यानी valve के खुलने की जगह, cm² में। सामान्य valve 3 से 4 cm² तक खुलता है। 1.0 cm² पर इसे severe माना जाता है, यानी सामान्य का करीब एक-चौथाई।
LVEF यानी ejection fraction बताता है कि heart का पंप करने वाला हिस्सा हर धड़कन में कितना खून बाहर भेज रहा है। 50 से 70 प्रतिशत सामान्य माना जाता है।
जब आंकड़े आपस में मेल न खाएं
यही वह स्थिति है जिसमें सबसे ज़्यादा उलझन होती है, और इसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है।
कई बार valve area तो severe सीमा में होता है, लेकिन mean gradient 40 mmHg से नीचे रहता है। दोनों एक साथ कैसे हो सकते हैं?
इसकी वजह यह है कि gradient तभी ऊंचा बनता है जब heart में इतनी ताकत बची हो कि वह खून को पूरे ज़ोर से आगे भेज सके। अगर पंप करने की ताकत कमज़ोर है, या heart का हिस्सा छोटा और सख़्त हो चुका है, तो हर धड़कन में कम खून निकलता है और दबाव का अंतर भी कम बनता है। Valve उतना ही सिकुड़ा रहता है, लेकिन gradient उस गंभीरता को दिखा नहीं पाता।
इसे low-flow low-gradient severe aortic stenosis कहते हैं। इसमें एक और आंकड़ा देखा जाता है, stroke volume index, और 35 mL/m² से कम होने पर बहाव कम माना जाता है। कमज़ोर पंपिंग वाले मामलों में अक्सर dobutamine stress echo करनी पड़ती है, ताकि असली गंभीरता सामने आ सके।
इलाज के लिहाज़ से यह स्थिति अहम है। अगर यहां गंभीरता कम आंकी जाए तो इलाज देर से शुरू होता है। मेरे पास ऐसे मरीज़ आए हैं जिन्हें सालों तक moderate मानकर दोबारा जांच पर टाला जाता रहा।
Report क्या नहीं बताती
Report यह नहीं बताती कि valve बदलवाना चाहिए या नहीं।
Guideline के मुताबिक यह फ़ैसला गंभीरता और लक्षण, दोनों को मिलाकर लिया जाता है। Severe stenosis के साथ अगर चलने पर सांस फूलती है, सीने में भारीपन रहता है, चक्कर आते हैं या बेहोशी हुई है, तो इलाज पर तुरंत विचार होना चाहिए। Severe होने पर भी अगर कोई लक्षण नहीं है, तो कई मरीज़ों को नियमित जांच पर रखा जाता है।
OPD में मैं एक सवाल ज़रूर पूछता हूं। कई बुज़ुर्ग मरीज़ कहते हैं कि उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं है, जबकि असल में उन्होंने चलना-फिरना धीरे-धीरे कम कर दिया होता है। सीढ़ी चढ़ना छोड़ देना भी एक लक्षण है, भले ही वह report में कहीं दर्ज न हो। यह सवाल मैं अक्सर मरीज़ से नहीं, उनके परिजनों से पूछता हूं, क्योंकि जवाब ज़्यादा सही मिलता है।
Moderate aortic stenosis वाले मरीज़ों के लिए एक बात ध्यान देने लायक है। ACC/AHA guideline के मुताबिक moderate aortic stenosis आमतौर पर हर साल करीब 0.3 m/s रफ़्तार, 7 mmHg gradient और 0.1 cm² valve area की दर से बढ़ती है। यानी moderate कोई ठहरी हुई स्थिति नहीं, बल्कि आगे बढ़ने वाली बीमारी है। इसीलिए दोबारा जांच की तय तारीख टालनी नहीं चाहिए।
Cardiologist को कब दिखाएं
अगर report में severe लिखा है, तो valve का काम करने वाले cardiologist से एक बार सलाह ज़रूर ले लेनी चाहिए, चाहे लक्षण हों या न हों।
Moderate के साथ अगर लक्षण मौजूद हैं, तब भी दिखा लेना बेहतर है, क्योंकि तब यह तय करना होता है कि तकलीफ़ valve की वजह से है या किसी और कारण से।
और अगर आंकड़े आपस में मेल नहीं खा रहे, जैसा ऊपर बताया गया, तो यह अपने आप में दिखाने की पर्याप्त वजह है। ऐसे मामलों में गंभीरता तय करना ही सबसे बड़ा काम होता है।
Aortic stenosis के लक्षण और इलाज के विकल्प aortic stenosis के इस page पर विस्तार से दिए गए हैं। अगर valve बदलने पर बात चल रही है, तो TAVI क्या होता है पहले पढ़ लें, और TAVI के लिए सही उम्मीदवार कौन है वाला page भी देख लें।
Jaipur में echo कहां कराएं
Echo ज़्यादातर बड़े cardiology सेंटरों में हो जाती है। Valve की बीमारी में फ़र्क़ मशीन से कम और नाप करने वाले के अनुभव से ज़्यादा पड़ता है, खासकर low-flow वाले मामलों में, जहां नापने का तरीका ही नतीजा बदल देता है।
कौन सी जांच कब और क्यों की जाती है, यह valve के इलाज से पहले होने वाली जांचों वाले page पर दिया गया है। वह page बताता है कि जांचें कैसे होती हैं, और यह page बताता है कि उनके आंकड़ों का मतलब क्या है।
Valve की जांच और इलाज Eternal Hospital, Jaipur में हमारे TAVI और structural heart programme के तहत किया जाता है। बाहर से आने वाले मरीज़ अपनी report पहले भेज दें, ताकि पहली मुलाकात ज़्यादा काम की रहे।
दिखाने आते समय पूरी report साथ लाएं, सिर्फ़ आखिरी summary लाइन नहीं। पुरानी echo भी रखें। दो reports के बीच का अंतर अक्सर किसी एक आंकड़े से ज़्यादा बताता है।
About Dr. Prem Ratan Degawat
Dr. Prem Ratan Degawat is a senior interventional cardiologist in Jaipur who specialises in structural heart disease. He is Associate Director of the TAVR and Structural Heart Disease Program at Eternal Hospital and has performed more than 600 TAVI procedures, including bicuspid, valve-in-valve, and TAVR-in-TAVR cases.
He completed his DM in Cardiology at King George’s Medical University, Lucknow, and trained in advanced structural heart intervention at IRCCS Humanitas in Italy. He is among a small number of cardiologists in India certified in TAVI, MitraClip, TRI-Clip, and TMVR procedures.
Dr. Degawat is known for explaining conditions and options in plain language, so patients and families can decide with confidence.
Consultation details:
- Hospital: Eternal Hospital, 3A Jagatpura Road, Near Jawahar Circle, Jaipur 302017
- OPD: Monday to Saturday, 10:00 AM to 4:00 PM
- Clinic: 6/384, In front of Railway Headquarter, Sector 6, Malviya Nagar, Jaipur
- Contact: +91-8960594076
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Mean gradient 45 mmHg का मतलब क्या है?
2020 ACC/AHA guideline के मुताबिक 40 mmHg या उससे ऊपर severe aortic stenosis माना जाता है, इसलिए 45 severe सीमा में आता है। इसका मतलब है कि valve बदलने पर विचार शुरू होना चाहिए। आगे का फ़ैसला आपके लक्षणों और बाकी आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
Valve area 0.8 cm² है, क्या यह चिंता की बात है?
1.0 cm² या उससे कम severe माना जाता है, इसलिए 0.8 severe सीमा में है। यह ऐसी स्थिति नहीं कि उसी दिन भागना पड़े, लेकिन इसे टालना ठीक नहीं। valve का काम करने वाले cardiologist से एक बार सलाह ले लें।
क्या severe होने पर तुरंत ऑपरेशन ज़रूरी है?
हमेशा नहीं। अगर गंभीरता के साथ लक्षण भी हैं, तो इलाज जल्दी होना चाहिए। बिना लक्षण वाले कई मरीज़ों को नियमित जांच पर रखा जाता है। यह फ़ैसला cardiologist ही करेंगे।
LVEF कम है, क्या इसका मतलब valve ठीक नहीं होगा?
नहीं। पंप करने की ताकत का कमज़ोर होना अक्सर valve पर पड़े बोझ का ही नतीजा होता है, और valve बदलने के बाद कई मरीज़ों में LVEF सुधर जाती है। कम LVEF इलाज रोकने की वजह नहीं है।
Echo दोबारा कितने समय बाद करानी चाहिए?
यह गंभीरता पर निर्भर करता है। Severe में आमतौर पर छह महीने से एक साल के बीच, moderate में करीब हर साल, और mild में उससे कम बार। सही समय आपके cardiologist तय करेंगे।
Report में “sclerosis” लिखा है, क्या यह stenosis ही है?
नहीं। Aortic sclerosis का मतलब है कि valve मोटा हो चुका है, लेकिन खून के बहाव में रुकावट अभी नहीं आई। यह stenosis से पहले की स्थिति है। इस पर इलाज नहीं, नज़र रखी जाती है।









