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डायबिटीज के मरीज़ों में TAVI: क्या एओर्टिक स्टेनोसिस का इलाज बिना सर्जरी हो सकता है?

Medically reviewed by Dr. Prem Ratan Degawat, MD, DM (Cardiology)

Senior Interventional Cardiologist · Associate Director, TAVR & Structural Heart Disease Program, Eternal Hospital, Jaipur

Last updated on Jul 12, 2026 · View LinkedIn profile

हाँ, ज़्यादातर मामलों में हो सकता है। अगर आपको डायबिटीज है और डॉक्टर ने बताया है कि दिल का एओर्टिक वाल्व सिकुड़ गया है, तो घबराइए मत। कई डायबिटिक मरीज़ों को यह लगता है कि उनके लिए वाल्व का इलाज मुश्किल या नामुमकिन है। असल में TAVI (टीएवीआई) नाम की एक तकनीक ऐसे मरीज़ों के लिए अक्सर सबसे सुरक्षित रास्ता बन जाती है, क्योंकि इसमें छाती नहीं खोली जाती।

इस लेख में हम सीधी और साफ़ बात करेंगे। डायबिटीज में वाल्व की बीमारी ज़्यादा क्यों होती है, ओपन हार्ट सर्जरी शुगर के मरीज़ों के लिए ज़्यादा जोखिम भरी क्यों होती है, और TAVI इस पूरे हिसाब को कैसे बदल देती है।

डायबिटीज के मरीज़ों में एओर्टिक स्टेनोसिस ज़्यादा क्यों होता है

एओर्टिक स्टेनोसिस का मतलब है दिल के मुख्य वाल्व का सख़्त और सिकुड़ जाना। इस वाल्व पर धीरे-धीरे कैल्शियम जमता है और यह पूरा नहीं खुल पाता। नतीजा, दिल को खून पंप करने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

डायबिटीज इस प्रक्रिया को तेज़ कर देती है। लगातार हाई ब्लड शुगर वाल्व की परत में हल्की सूजन बनाए रखता है। यही सूजन कैल्शियम जमने की रफ़्तार बढ़ा देती है। इसलिए शुगर के मरीज़ों में वाल्व कई बार सामान्य लोगों से जल्दी सख़्त होता है।

इसका असर लक्षणों पर भी पड़ता है। सीने में भारीपन, चलने पर साँस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना, ये सब एओर्टिक स्टेनोसिस के संकेत हो सकते हैं। डायबिटीज की वजह से नसों की संवेदना कम होने पर ये लक्षण कई बार देर से पकड़ में आते हैं। एओर्टिक स्टेनोसिस के लक्षण और इलाज के विकल्प समझना हर डायबिटिक मरीज़ के लिए ज़रूरी है।

शुगर के मरीज़ों के लिए ओपन हार्ट सर्जरी ज़्यादा जोखिम भरी क्यों है

ओपन हार्ट सर्जरी में छाती की हड्डी (स्टर्नम) को बीच से काटा जाता है। यहीं पर डायबिटीज का असली जोखिम शुरू होता है।

हाई ब्लड शुगर में घाव धीरे भरते हैं। छाती की हड्डी का घाव बड़ा होता है और उसे जुड़ने में हफ़्ते लगते हैं। शुगर के मरीज़ों में इस घाव में इन्फेक्शन का ख़तरा साफ़ तौर पर ज़्यादा रहता है। स्टर्नम के गहरे इन्फेक्शन को मीडियास्टिनाइटिस कहते हैं, और यह डायबिटिक मरीज़ों में ज़्यादा देखा जाता है।

इसके अलावा शुगर के कई मरीज़ों की किडनी पहले से कमज़ोर होती है। लंबी सर्जरी, हार्ट-लंग मशीन और एनेस्थीसिया ऐसे मरीज़ों पर ज़्यादा दबाव डालते हैं। ठीक होने में भी छह से आठ हफ़्ते लग सकते हैं। यही वजह है कि कई डायबिटिक मरीज़ों को दूसरे अस्पतालों में “आप सर्जरी के लिए बहुत जोखिम भरे हैं” कहकर लौटा दिया जाता है।

TAVI इस पूरे हिसाब को कैसे बदल देती है

TAVI में छाती नहीं खोली जाती। नया वाल्व आमतौर पर जांघ की नस के रास्ते एक पतली ट्यूब से दिल तक पहुँचाया जाता है और पुराने सख़्त वाल्व के अंदर ही लगा दिया जाता है। न बड़ा घाव, न स्टर्नम की कटाई।

डायबिटिक मरीज़ों के लिए यह फ़र्क़ बहुत बड़ा है। जब छाती का बड़ा घाव ही नहीं है, तो घाव के देर से भरने और इन्फेक्शन की सबसे बड़ी समस्या काफ़ी हद तक हट जाती है। मरीज़ अक्सर तीन से पाँच दिन में घर चला जाता है।

यहाँ मैं एक बात साफ़ रखना चाहता हूँ, ताकि झूठी उम्मीद न बने। TAVI हर जोखिम को ख़त्म नहीं करती। लेकिन सबूत उत्साह बढ़ाने वाले हैं। कई बड़े अध्ययनों के विश्लेषण (meta-analysis, Catheterization and Cardiovascular Interventions, 2024-2025) में पाया गया कि TAVI के बाद डायबिटिक और नॉन-डायबिटिक मरीज़ों के शुरुआती और मध्यम अवधि के नतीजे काफ़ी हद तक बराबर रहते हैं। यानी सर्जरी में डायबिटीज जो बड़ा जोखिम बढ़ाती है, TAVI में वह अंतर बहुत कम हो जाता है। किन मरीज़ों के लिए TAVI सही रहती है, यह TAVI बिना ओपन हार्ट सर्जरी: कौन योग्य है में विस्तार से समझाया गया है।

एक और बात। हमारे यहाँ डायबिटिक दिल के मरीज़ों के लिए MitraClip जैसी बिना सर्जरी वाली तकनीक पहले से अच्छे नतीजे दे रही है। TAVI उसी सोच को एओर्टिक वाल्व पर लागू करती है।

डायबिटिक मरीज़ में TAVI से पहले क्या-क्या जाँचा जाता है

अच्छी TAVI आधी तैयारी में तय होती है। डायबिटिक मरीज़ में मैं तीन चीज़ों पर ख़ास ध्यान देता हूँ।

  • शुगर का नियंत्रण (HbA1c): पिछले तीन महीने का औसत शुगर बताता है कि कंट्रोल कैसा रहा है। बहुत बेकाबू शुगर हो तो प्रक्रिया से पहले उसे बेहतर करने की कोशिश होती है।
  • किडनी की जाँच: TAVI में एक कॉन्ट्रास्ट डाई इस्तेमाल होती है, जो कमज़ोर किडनी पर असर डाल सकती है। डायबिटिक मरीज़ों की किडनी अक्सर पहले से नाज़ुक होती है, इसलिए क्रिएटिनिन और eGFR ज़रूर देखते हैं।
  • नसों का रास्ता: शुगर के मरीज़ों में पैरों की नसें सिकुड़ी या सख़्त हो सकती हैं। CT एंजियोग्राफी से हम देखते हैं कि जांघ की नस से वाल्व सुरक्षित पहुँच पाएगा या नहीं।

डायबिटिक मरीज़ के लिए TAVI की प्लानिंग में क्या बदलाव होते हैं

यहीं पर तजुर्बा मायने रखता है। हर डायबिटिक मरीज़ की योजना थोड़ी अलग बनती है।

किडनी बचाने के लिए हम कॉन्ट्रास्ट डाई की मात्रा जितनी कम रखी जा सके, उतनी रखते हैं और प्रक्रिया से पहले-बाद पानी की सही मात्रा का ध्यान रखते हैं। प्रक्रिया वाले दिन शुगर न बहुत ऊपर जाए, न नीचे गिरे, इसके लिए एक साफ़ प्रोटोकॉल रहता है। कई बार सुबह की इंसुलिन या दवा की मात्रा उस दिन बदलनी पड़ती है।

यह वह बारीकी है जो नतीजा तय करती है। सही योजना के साथ एक डायबिटिक मरीज़ भी TAVI को उतनी ही अच्छी तरह झेल पाता है जितना कोई और।

एक असल जैसी मिसाल: अलवर के 71 साल के मरीज़

(नीचे दी गई मिसाल असल मरीज़ों के अनुभव पर आधारित एक प्रतिनिधि उदाहरण है। निजता की सुरक्षा के लिए ब्योरे बदले गए हैं।)

अलवर से आए 71 साल के एक सज्जन को 15 साल से डायबिटीज थी। उन्हें थोड़ा चलने पर ही साँस फूलती थी और दो बार चक्कर खाकर गिर चुके थे। जाँच में गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस निकला। दो जगह उन्हें बताया गया कि उम्र और शुगर की वजह से ओपन हार्ट सर्जरी बहुत जोखिम भरी है।

हमने पूरी हार्ट टीम के साथ उनका मूल्यांकन किया। किडनी हल्की कमज़ोर थी, इसलिए कॉन्ट्रास्ट कम रखने की योजना बनी। शुगर को कुछ दिन बेहतर किया गया। TAVI सफल रही और वे प्रक्रिया के तीसरे दिन घर लौट गए। एक महीने में वे बिना साँस फूले अपने रोज़ के काम करने लगे। TAVI के बाद घर पर क्या करें, इसकी पूरी जानकारी अलग गाइड में दी गई है।

अपने एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से TAVI से पहले क्या बात करें

डायबिटिक मरीज़ में सबसे अच्छे नतीजे तब आते हैं जब शुगर का डॉक्टर और दिल का डॉक्टर मिलकर योजना बनाएँ। मरीज़ या परिवार यह छोटी चेकलिस्ट साथ रखें।

  • पिछले तीन महीने का HbA1c और मौजूदा शुगर रिकॉर्ड।
  • किडनी की ताज़ा रिपोर्ट (क्रिएटिनिन, eGFR)।
  • सभी दवाओं की सूची, ख़ासकर इंसुलिन, मेटफॉर्मिन और खून पतला करने वाली दवाएँ।
  • प्रक्रिया वाले दिन दवा कैसे लेनी है, यह पहले से तय कर लें।

जयपुर में डायबिटिक मरीज़ के लिए TAVI का खर्च और कवरेज

भारत में TAVI का खर्च आमतौर पर निजी अस्पतालों में ₹15 लाख से ₹30 लाख के बीच रहता है। यह वाल्व के प्रकार, अस्पताल और मामले की जटिलता पर निर्भर करता है। स्वदेशी वाल्व चुनने पर खर्च कुछ कम हो सकता है। पूरा ब्योरा TAVI सर्जरी की लागत जयपुर पेज पर दिया गया है।

बीमा और सरकारी योजनाओं में कवरेज पॉलिसी और पात्रता पर निर्भर करता है। किसी भी योजना में TAVI कवर होगा या नहीं, यह प्रक्रिया से पहले अस्पताल की बीमा डेस्क से पक्का ज़रूर कर लें।

निष्कर्ष

डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं कि आपके वाल्व की बीमारी का इलाज नहीं हो सकता। जिस चीज़ ने सर्जरी को जोखिम भरा बनाया था, वही TAVI में काफ़ी हद तक कम हो जाती है। सही जाँच, किडनी और शुगर की सोची-समझी योजना के साथ, कई डायबिटिक मरीज़ आज बिना छाती खुलवाए नया वाल्व पा रहे हैं।

अगर आपको डायबिटीज है और किसी ने वाल्व सर्जरी के लिए मना कर दिया है, तो एक बार यह ज़रूर जानिए कि TAVI आपके लिए सुरक्षित विकल्प है या नहीं। TAVI के लिए योग्यता समझने के लिए डॉ. डेगावत से जयपुर के एटरनल हॉस्पिटल में सलाह लें। अपॉइंटमेंट के लिए +91-8960594076 पर कॉल करें।

डॉ. प्रेम रतन डेगावत के बारे में

डॉ. प्रेम रतन डेगावत जयपुर के अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट हैं, जो स्ट्रक्चरल हार्ट प्रोसीजर में विशेषज्ञता रखते हैं। वे वर्तमान में इटरनल हॉस्पिटल में TAVR और स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज प्रोग्राम के एसोसिएट डायरेक्टर हैं। उन्होंने 600 से अधिक TAVI प्रोसीजर किए हैं, जिनमें बाईकस्पिड वाल्व और वाल्व इन वाल्व जैसे जटिल केस भी शामिल हैं।

उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ से DM कार्डियोलॉजी की पढ़ाई पूरी की है और इटली के IRCCS ह्यूमैनिटास रिसर्च हॉस्पिटल में एडवांस्ड ट्रेनिंग ली है। डॉ. डेगावत TAVI, मिट्राक्लिप, TRI-Clip, TMVR जैसी प्रोसीजर में प्रमाणित भारत के गिने-चुने कार्डियोलॉजिस्ट में से एक हैं।

डॉ. डेगावत मरीजों और उनके परिवार को हर सवाल का जवाब सरल भाषा में देते हैं, ताकि इलाज का फैसला पूरी जानकारी के साथ लिया जा सके।

कंसल्टेशन डिटेल:

  • हॉस्पिटल: Eternal Hospital, 3A Jagatpura Road, Near Jawahar Circle, Jaipur 302017
  • OPD समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक
  • Clinic: 6/384, In front of Railway Headquarter, Sector 6, Malviya Nagar, Jaipur
  • संपर्क: +91-8960594076

FAQs:

क्या डायबिटीज के मरीज़ में TAVI सुरक्षित है?

ज़्यादातर मामलों में हाँ। बड़े अध्ययनों में TAVI के बाद डायबिटिक और नॉन-डायबिटिक मरीज़ों के शुरुआती नतीजे लगभग बराबर पाए गए हैं। सही तैयारी और किडनी-शुगर की योजना इसे और सुरक्षित बनाती है।

अगर मुझे सर्जरी के लिए मना कर दिया गया है, तो क्या TAVI हो सकती है?

अक्सर हाँ। TAVI ख़ास तौर पर उन मरीज़ों के लिए बनी है जिन्हें ओपन हार्ट सर्जरी के लिए ज़्यादा जोखिम भरा माना जाता है। एक बार हार्ट टीम से मूल्यांकन ज़रूर कराएँ।

TAVI के बाद डायबिटिक मरीज़ कितने दिन में ठीक होता है?

ज़्यादातर मरीज़ तीन से पाँच दिन में घर चले जाते हैं और कुछ हफ़्तों में रोज़ के काम करने लगते हैं। ओपन हार्ट सर्जरी में यह समय छह से आठ हफ़्ते तक हो सकता है।

क्या शुगर ज़्यादा हो तो TAVI टालनी पड़ती है?

बहुत बेकाबू शुगर हो तो पहले उसे बेहतर करने की कोशिश होती है। लेकिन अगर वाल्व की बीमारी गंभीर और लक्षण वाली है, तो देर करना भी जोखिम भरा है। फ़ैसला हार्ट टीम मिलकर लेती है।

डायबिटिक मरीज़ में TAVI से किडनी को ख़तरा है क्या?

कॉन्ट्रास्ट डाई कमज़ोर किडनी पर असर डाल सकती है। इसलिए डायबिटिक मरीज़ों में हम डाई कम रखते हैं और पानी का ध्यान रखते हैं, ताकि किडनी सुरक्षित रहे।

जयपुर में डायबिटिक मरीज़ के लिए TAVI का खर्च कितना है?

निजी अस्पतालों में TAVI का खर्च आमतौर पर ₹15 से ₹30 लाख के बीच रहता है। यह वाल्व के प्रकार और मामले पर निर्भर करता है। बीमा कवरेज प्रक्रिया से पहले पक्का कर लें।

TAVI के लिए डॉ. डेगावत से कहाँ मिलें?

डॉ. प्रेम रतन डेगावत की OPD एटरनल हॉस्पिटल, जगतपुरा रोड, जयपुर में सोमवार से शनिवार सुबह 10 से शाम 4 बजे तक रहती है। अपॉइंटमेंट के लिए +91-8960594076 पर कॉल करें।