Summer-Heat Stroke vs Heart Attack

गर्मियों में हृदय का ख्याल कैसे रखें? लू और हृदयाघात में फर्क जाने

राजस्थान की गर्मी पूरे देश में मशहूर है। जयपुर में मई और जून के महीने में तापमान पैंतालीस डिग्री से ऊपर चला जाता है। इस मौसम में हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।

बहुत से लोग लू और हृदयाघात के लक्षणों में फर्क नहीं कर पाते। दोनों में घबराहट, कमज़ोरी और बेचैनी महसूस होती है। लेकिन दोनों की वजह और इलाज बिल्कुल अलग हैं।

इस लेख में आप जानेंगे कि गर्मी में हृदय को स्वस्थ कैसे रखें, लू और हृदयाघात में क्या अंतर है, और कब तुरंत चिकित्सक के पास जाना ज़रूरी है।

गर्मी में हृदय को ज़्यादा मेहनत क्यों करनी पड़ती है?

जब बाहर का तापमान बढ़ता है, तो शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए ज़्यादा काम करना पड़ता है। इसके लिए रक्त संचार तेज़ होता है। हृदय को ज़्यादा तेज़ धड़कना पड़ता है।

जिन लोगों की रक्त नलिकाएं पहले से कमज़ोर हैं, उनके लिए यह अतिरिक्त बोझ खतरनाक हो सकता है।

किन लोगों को ज़्यादा खतरा है?

  • पचास साल से ऊपर के लोग
  • जिन्हें पहले से हृदय रोग है
  • उच्च रक्तचाप या मधुमेह के मरीज़
  • जो बहुत कम पानी पीते हैं
  • जो धूप में ज़्यादा देर काम करते हैं
  • जो बाहर कड़ी मेहनत वाला व्यायाम करते हैं

लू और हृदयाघात में क्या फर्क है?

यह सबसे ज़रूरी जानकारी है। दोनों में कुछ लक्षण मिलते-जुलते दिखते हैं। लेकिन कारण और इलाज अलग-अलग हैं।

लू क्या होती है?

लू तब लगती है जब शरीर का तापमान बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। आमतौर पर चालीस डिग्री सेल्सियस से ऊपर। शरीर का ठंडक बनाने का तंत्र काम करना बंद कर देता है।

लू लगने के मुख्य लक्षण:

  • बहुत तेज़ बुखार, त्वचा गर्म और सूखी लगना
  • पसीना आना बंद हो जाना
  • चक्कर आना और मन भ्रमित होना
  • बेहोशी आना
  • साँस तेज़ होना

लू में सीने में दर्द नहीं होता। यही सबसे बड़ा अंतर है।

हृदयाघात क्या होता है?

हृदयाघात तब होता है जब हृदय तक रक्त ले जाने वाली कोई धमनी बंद हो जाती है। हृदय के उस हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिलती।

हृदयाघात के मुख्य लक्षण:

  • सीने में दर्द, भारीपन या दबाव
  • दर्द जो बाएँ हाथ, जबड़े या पीठ तक फैले
  • साँस फूलना
  • बहुत ज़्यादा पसीना आना, ठंडा और चिपचिपा पसीना
  • जी मिचलाना या उल्टी आना
  • बेचैनी और डर लगना

लू और हृदयाघात की तुलना

बातलू लगनाहृदयाघात
मुख्य कारणअत्यधिक गर्मीधमनी का बंद होना
सीने में दर्दनहींहाँ, अक्सर
त्वचा का हालगर्म और सूखीठंडी और पसीने वाली
बुखारहाँ, बहुत तेज़नहीं
पसीनाबंद हो जाता हैबहुत अधिक आता है
तुरंत क्या करेंठंडी जगह ले जाएं, पानी देंएक सौ आठ पर फोन करें, तुरंत चिकित्सालय जाएं

गर्मी में हृदयाघात का खतरा क्यों बढ़ता है?

गर्मी में कई चीज़ें मिलकर हृदयाघात का खतरा बढ़ाती हैं।

शरीर में पानी की कमी: कम पानी पीने से रक्त गाढ़ा हो जाता है। थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।

रक्तचाप में उतार-चढ़ाव: गर्मी में रक्तचाप तेज़ी से बदलता रहता है। यह हृदय के लिए नुकसानदेह है।

धड़कन तेज़ होना: अधिक गर्मी में हृदय तेज़ चलता है। जिनकी धमनियाँ पहले से कमज़ोर हैं, उनमें यह रुकावट को जल्दी बढ़ा सकता है।

कड़ी मेहनत: धूप में भारी काम या व्यायाम करना गर्मियों में जोखिम भरा होता है।

गर्मियों में हृदय को स्वस्थ रखने के आठ तरीके

पहला – भरपूर पानी पिएं

दिन में कम से कम आठ से दस गिलास पानी ज़रूर पिएं। बाहर निकलने से पहले पानी पिएं। प्यास लगने का इंतज़ार मत करें।

दूसरा – कड़ी धूप में बाहर मत जाएं

जयपुर में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक धूप सबसे तेज़ होती है। इस समय में घर के बाहर जाने से बचें।

तीसरा – व्यायाम का समय बदलें

बाहर का व्यायाम सुबह छह से सात बजे से पहले या शाम छह बजे के बाद करें। गर्मी में छत वाली जगह व्यायाम करना ज़्यादा सुरक्षित है।

चौथा – हल्के और ढीले कपड़े पहनें

सूती और हल्के कपड़े पहनें। ये शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।

पाँचवाँ – तला-भुना और भारी खाना कम खाएं

भारी भोजन के बाद हृदय को ज़्यादा काम करना पड़ता है। फल, सलाद और हल्का खाना लें। छाछ, नींबू पानी और नारियल पानी पिएं।

छठा – शराब और अधिक चाय-कॉफी से बचें

ये शरीर से पानी निकाल देते हैं और रक्तचाप बढ़ा सकते हैं।

सातवाँ – दवाइयाँ बंद मत करें

जिन्हें हृदय की तकलीफ है, वे गर्मी में भी अपनी नियमित दवाइयाँ लेते रहें। कुछ दवाइयाँ गर्मी में जल्दी खराब हो सकती हैं। चिकित्सक से पूछें कि उन्हें कहाँ रखना सही है।

आठवाँ – रक्तचाप और रक्त शर्करा जाँचते रहें

गर्मियों में हर हफ्ते रक्तचाप जाँचें। हृदय की पुरानी बीमारी है तो चिकित्सक के नियमित संपर्क में रहें।


इन लक्षणों को नज़रअंदाज़ मत करें

अगर गर्मी में नीचे दिए कोई भी लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं।

ये लक्षण दिखें तो फौरन एक सौ आठ पर फोन करें:

  • सीने में दर्द या भारीपन
  • बाएँ हाथ या जबड़े में दर्द
  • अचानक बहुत ज़्यादा पसीना आना
  • साँस लेने में तकलीफ
  • चक्कर आकर गिरना
  • धड़कन बहुत तेज़ या असामान्य होना

इन्हें “थकान है” या “गर्मी लग गई” मानकर अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।

गर्मी में किन हृदय रोगियों को अतिरिक्त सावधानी चाहिए?

कुछ लोगों के लिए गर्मी ज़्यादा जोखिम भरी होती है।

वाल्व रोग के मरीज़: जिनके हृदय के वाल्व कमज़ोर हैं, उनका हृदय पहले से ज़्यादा मेहनत कर रहा होता है। अधिक गर्मी और पानी की कमी उनके लिए गंभीर हो सकती है।

पेसमेकर वाले मरीज़: अत्यधिक गर्मी से पेसमेकर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। नियमित जाँच ज़रूरी है।

हाल ही में शल्य चिकित्सा या एंजियोप्लास्टी करवाने वाले: जिन्होंने हाल ही में कोई हृदय की प्रक्रिया करवाई है, वे गर्मी में अतिरिक्त सावधान रहें। चिकित्सक की सलाह के बिना बाहर भारी काम न करें।

बुज़ुर्ग मरीज़: पैंसठ साल से ऊपर के लोगों में शरीर की तापमान नियंत्रण करने की क्षमता कम होती है।

डॉ. प्रेम रतन देगावत के बारे में

डॉ. प्रेम रतन देगावत जयपुर के एक अनुभवी हस्तक्षेप हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। वे संरचनात्मक हृदय रोग और टीएवीआई (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व प्रत्यारोपण) में विशेषज्ञ हैं।

उन्होंने अब तक छह सौ से ज़्यादा टीएवीआई प्रक्रियाएं की हैं। इनमें जटिल मामले भी शामिल हैं।

डॉ. देगावत ने सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर से एमबीबीएस और एमडी किया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ से डीएम (हृदयरोग विज्ञान) किया। इटली के आईआरसीसीएस ह्यूमैनिटास अनुसंधान अस्पताल में उन्नत प्रशिक्षण लिया।

वे मित्राक्लिप, ट्राईक्लिप, टीएमवीआर, सीएवीआई और टीटीवीआर जैसी उन्नत प्रक्रियाओं में प्रमाणित हैं। पूरे भारत में बहुत कम चिकित्सक इन सभी प्रक्रियाओं में प्रशिक्षित हैं।

डॉ. देगावत की खासियत यह है कि वे मरीज़ों को सब कुछ आसान भाषा में समझाते हैं। परिवार के साथ बैठकर इलाज के विकल्प साझा करते हैं।

परामर्श की जानकारी:

  • अस्पताल: इटर्नल हॉस्पिटल, 3A जगतपुरा रोड, जवाहर सर्किल के पास, जयपुर 302017
  • OPD समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे
  • क्लिनिक: 6/384, रेलवे हेडक्वार्टर के सामने, सेक्टर 6, मालवीय नगर, जयपुर, राजस्थान 302017
  • संपर्क: +91-8960594076

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. गर्मियों में हृदयाघात का खतरा ज़्यादा क्यों होता है?

गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए हृदय को ज़्यादा तेज़ धड़कना पड़ता है। रक्तचाप और धड़कन बढ़ती है। पानी की कमी से रक्त गाढ़ा होता है और थक्का बनने का खतरा बढ़ जाता है।

2. लू और हृदयाघात में कैसे पहचानें कि क्या हो रहा है?

लू में सीने में दर्द नहीं होता और त्वचा गर्म तथा सूखी रहती है। हृदयाघात में सीने में दर्द या भारीपन होता है और ठंडा पसीना आता है। संशय हो तो बिना देर किए एक सौ आठ पर फोन करें।

3. क्या गर्मी में व्यायाम बंद कर देना चाहिए?

बंद करने की ज़रूरत नहीं। बाहर के व्यायाम का समय बदलें। सुबह छह-सात बजे से पहले करें। हृदय रोग है तो पहले चिकित्सक से पूछें कि कितना और कैसा व्यायाम सुरक्षित है।

4. जयपुर में गर्मी के मौसम में हृदय रोग विशेषज्ञ से कब मिलना चाहिए?

सीने में भारीपन, साँस फूलना, बार-बार चक्कर आना या धड़कन असामान्य लगे तो तुरंत मिलें। पुराना हृदय रोग है तो गर्मी शुरू होने से पहले एक बार जाँच ज़रूर करवाएं।

5. क्या मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना में हृदयाघात का इलाज शामिल है?

हाँ। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में हृदयाघात का इलाज और एंजियोप्लास्टी जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल हैं। राजस्थान के पंजीकृत परिवार सूचीबद्ध अस्पतालों में नकद रहित इलाज ले सकते हैं।

6. गर्मी में हृदय रोगियों को खाने-पीने में क्या ध्यान रखना चाहिए?

पानी, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी अधिक लें। तला-भुना, अत्यधिक नमक और भारी भोजन से बचें। शराब और ज़्यादा चाय-कॉफी न लें। फल और सब्ज़ियाँ अधिक खाएं।

7. डॉ. प्रेम रतन देगावत से परामर्श कैसे लें?

इटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर में +91-9549158888 पर फोन करके समय ले सकते हैं। ओपीडी सोमवार से शनिवार, सुबह दस बजे से दोपहर चार बजे तक चलती है।

8. क्या पुराने हृदय रोगियों को गर्मियों में अपनी दवाइयाँ बदलनी चाहिए?

दवाइयाँ खुद से मत बदलें। गर्मी शुरू होने पर एक बार चिकित्सक से मिलें और पूछें कि कुछ बदलाव ज़रूरी है या नहीं। कुछ रक्तचाप की दवाइयाँ गर्मी में अधिक असर कर सकती हैं।


अस्वीकरण:

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी बीमारी का निदान नहीं है और न ही किसी योग्य चिकित्सक की सलाह का विकल्प है। यदि आपको या आपके किसी परिजन को सीने में दर्द, साँस फूलना या कोई भी हृदय से जुड़ा लक्षण महसूस हो, तो तुरंत किसी अनुभवी चिकित्सक से मिलें या आपात स्थिति में एक सौ आठ पर फोन करें। कोई भी इलाज, दवाई या व्यायाम शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।