एंजियोग्राफी की रिपोर्ट हाथ में आते ही एक सवाल ज़हन में आता है।
“डॉक्टर, 70% ब्लॉकेज लिखा है। यह कितना गंभीर है?”
यह सवाल बिल्कुल सही है। और इसका सीधा जवाब मिलना चाहिए।
ब्लॉकेज का प्रतिशत सिर्फ एक अंक नहीं होता। इसके पीछे पूरी बात होती है। यह बताता है कि नस कितनी तंग हुई है, खून कितना पहुँच रहा है, और आगे क्या करना होगा।
जयपुर में दिल के हज़ारों मरीज़ देखने के बाद डॉ. प्रेम रतन डेगावत एक बात हमेशा कहते हैं: “रिपोर्ट का अंक देखने से ज़्यादा ज़रूरी है — ब्लॉकेज की किस्म देखना।”
इस लेख में समझेंगे कि 50%, 70%, और 90% ब्लॉकेज का असल में क्या मतलब होता है। कौन सी ज़्यादा खतरनाक हो सकती है। और रिपोर्ट आने के बाद अगला कदम क्या होना चाहिए।
दिल की नसें कैसे काम करती हैं?
दिल एक पंप है। यह चौबीसों घंटे खून पंप करता रहता है।
लेकिन खुद दिल को भी खून चाहिए। यह खून दिल की अपनी नसों से आता है। इन्हें कोरोनरी धमनियाँ कहते हैं।
जब इन नसों के अंदर चर्बी और कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है, तब नस तंग होती जाती है। इसी तंगाहट को ब्लॉकेज कहते हैं।
नस जितनी ज़्यादा बंद होगी, दिल की माँसपेशी तक उतना कम खून पहुँचेगा।
50% ब्लॉकेज – इसे हल्के में न लें
50% ब्लॉकेज का मतलब है नस आधी बंद हो गई है।
आधी अभी भी खुली है। रोज़मर्रा के कामों में अक्सर कोई तकलीफ नहीं होती।
लेकिन यहाँ एक बड़ी भूल होती है।
50% ब्लॉकेज वाली नस कभी-कभी 90% ब्लॉकेज से भी ज़्यादा खतरनाक होती है।
कैसे? नस के अंदर जो जमाव होता है, वह दो तरह का होता है। एक होता है पुराना और कठोर। दूसरा होता है नया और मुलायम।
मुलायम जमाव अचानक टूट सकता है। टूटने के बाद नस में खून का थक्का जम जाता है। नस पूरी तरह बंद हो जाती है। यही दिल के दौरे का सबसे आम कारण है।
और यह मुलायम जमाव 50% की ब्लॉकेज में भी हो सकता है।
इसीलिए डॉक्टर सिर्फ प्रतिशत नहीं देखते। जमाव की किस्म भी देखते हैं।
70% ब्लॉकेज — कब चिंता करें?
70% ब्लॉकेज को डॉक्टर “गंभीर ब्लॉकेज” मानते हैं।
नस काफी तंग हो चुकी है। तेज़ चलने, सीढ़ियाँ चढ़ने या मेहनत के काम पर सीने में भारीपन आने लगता है। इसे एनजाइना कहते हैं।
70% ब्लॉकेज में इलाज का फैसला इन बातों पर निर्भर करता है:
- क्या तकलीफ हो रही है या नहीं
- कौन सी नस बंद है
- जमाव कठोर है या मुलायम
- और कितनी नसें प्रभावित हैं
कुछ मामलों में दवाइयाँ काफी होती हैं। कुछ में स्टेंट लगाना पड़ता है।
यह फैसला सिर्फ रिपोर्ट देखकर नहीं होता। पूरी जाँच और मरीज़ की हालत देखकर होता है।
90% ब्लॉकेज – क्या यह सबसे खतरनाक है?
90% ब्लॉकेज सुनते ही घबराहट होती है। यह स्वाभाविक है।
लेकिन एक ज़रूरी बात समझें।
90% की पुरानी और कठोर ब्लॉकेज में अक्सर दिल ने खुद को ढाल लिया होता है। पास की छोटी नसें बड़ी होकर खून की कुछ आपूर्ति संभाल लेती हैं। इसे कोलेटरल सर्कुलेशन कहते हैं।
ऐसे मरीज़ वर्षों से सीने में दर्द के साथ जी रहे होते हैं।
लेकिन 50% की नई और मुलायम ब्लॉकेज में यह बफर नहीं होता। वह अचानक टूटती है। दिल को चेतावनी का मौका नहीं मिलता।
इसका मतलब यह नहीं कि 90% ब्लॉकेज हल्की है। इसका मतलब यह है कि दोनों अपने-अपने तरीके से खतरनाक हैं। और दोनों का इलाज अलग होता है।
कब स्टेंट लगता है, कब दवाई चलती है?
यह सबसे अहम सवाल है।
जयपुर के इटर्नल हॉस्पिटल में डॉ. प्रेम रतन डेगावत हर मरीज़ के लिए यह फैसला अलग-अलग करते हैं।
स्टेंट लगाने की ज़रूरत आमतौर पर तब होती है जब:
- 70% या उससे ज़्यादा ब्लॉकेज हो और लक्षण हों
- दिल की माँसपेशी को खून कम मिल रहा हो
- दवाइयों से आराम न आ रहा हो
- जाँच में खून का बहाव कमज़ोर दिखे
दवाइयों से काम चल सकता है जब:
- ब्लॉकेज 50-60% हो और लक्षण न हों
- जमाव पुराना और स्थिर हो
- दिल की माँसपेशी सही काम कर रही हो
- मरीज़ दवा और परहेज़ में सक्रिय हो
स्टेंट हमेशा ज़रूरी नहीं होता। और हमेशा टाला भी नहीं जाना चाहिए। यह संतुलन का फैसला है।
कब बाईपास सर्जरी की बात होती है?
कुछ मामलों में स्टेंट काफी नहीं होता।
जब तीन या उससे ज़्यादा नसें बुरी तरह बंद हों, तब बाईपास सर्जरी बेहतर विकल्प होती है।
बाईपास में शरीर की दूसरी नस लेकर बंद नस के आगे-पीछे एक नया रास्ता बनाया जाता है। खून उस नए रास्ते से बहने लगता है।
यह फैसला डॉक्टर अकेले नहीं करते। हृदय रोग विशेषज्ञ, हृदय शल्य चिकित्सक (कार्डियक सर्जन) और मरीज़ मिलकर करते हैं।
एंजियोग्राफी रिपोर्ट में क्या देखें?
रिपोर्ट मिलने पर ये बातें ध्यान से पढ़ें:
कौन सी नस बंद है: LAD (बाईं मुख्य नस), RCA (दाईं नस), या LCX — तीनों की अहमियत अलग होती है। LAD सबसे अहम मानी जाती है।
कितनी नसें बंद हैं: एक नस बंद हो तो एक स्टेंट। तीनों बंद हों तो बाईपास पर विचार।
FFR या iFR का उल्लेख: यह जाँच बताती है कि ब्लॉकेज से खून का बहाव असल में प्रभावित हुआ है या नहीं। कुछ रिपोर्टों में यह होता है। डॉ. डेगावत इसे बहुत उपयोगी मानते हैं।
LVEF (दिल की पंपिंग क्षमता): रिपोर्ट में अक्सर यह भी लिखा होता है। 55% से ऊपर सामान्य माना जाता है।
असली मामला: रिपोर्ट आई – अब क्या करें?
मान लीजिए आपकी रिपोर्ट में लिखा है: “LAD में 75% ब्लॉकेज।”
घबराइए नहीं। पर टालिए भी नहीं।
यह करें:
पहला कदम — रिपोर्ट की एक फोटोकॉपी निकलवाएँ। मूल रखें, फोटोकॉपी डॉक्टर को दें।
दूसरा कदम — किसी अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें। रिपोर्ट, ईसीजी और इकोकार्डियोग्राफी साथ ले जाएँ।
तीसरा कदम — डॉक्टर से पूछें: “क्या मुझे अभी स्टेंट चाहिए? या दवाई से काम चलेगा?”
चौथा कदम — घर में नमक, तेल, तनाव कम करें। यह अभी से शुरू करें।
जयपुर में इटर्नल हॉस्पिटल के मरीज़ अक्सर डॉ. डेगावत के पास रिपोर्ट लेकर आते हैं। वे हर रिपोर्ट को मरीज़ की भाषा में समझाते हैं। और परिवार के साथ मिलकर फैसला करते हैं।
डॉ. प्रेम रतन डेगावत के बारे में
डॉ. प्रेम रतन डेगावत जयपुर के सबसे अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट में से एक हैं। वे इटर्नल हॉस्पिटल में TAVR और स्ट्रक्चरल हार्ट डिज़ीज़ प्रोग्राम के एसोसिएट डायरेक्टर हैं।
उन्होंने 600 से ज़्यादा TAVI प्रक्रियाएँ की हैं। इनमें बाईकस्पिड वाल्व और वाल्व-इन-वाल्व जैसे जटिल मामले भी शामिल हैं।
उन्होंने लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से DM कार्डियोलॉजी की है। इटली के IRCCS ह्यूमैनिटास रिसर्च हॉस्पिटल में उन्नत प्रशिक्षण लिया है।
डॉ. डेगावत की खासियत यह है कि वे मरीज़ और उसके परिवार को पूरा समय देते हैं। रिपोर्ट का हर पहलू सरल भाषा में समझाते हैं। इलाज का फैसला मरीज़ की सहमति से होता है।
परामर्श के लिए:
- अस्पताल: इटर्नल हॉस्पिटल, 3A जगतपुरा रोड, जवाहर सर्किल के पास, जयपुर 302017
- OPD समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे
- क्लिनिक: 6/384, रेलवे हेडक्वार्टर के सामने, सेक्टर 6, मालवीय नगर, जयपुर, राजस्थान 302017
- संपर्क: +91-8960594076
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल 1: दिल में कितनी प्रतिशत ब्लॉकेज खतरनाक मानी जाती है?
70% या उससे ज़्यादा ब्लॉकेज को आमतौर पर गंभीर माना जाता है। लेकिन 50% की नई और मुलायम ब्लॉकेज भी अचानक दिल का दौरा दे सकती है। प्रतिशत के साथ-साथ ब्लॉकेज की किस्म भी उतनी ही अहम है।
सवाल 2: 50% ब्लॉकेज में क्या स्टेंट लगवाना ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं। 50% ब्लॉकेज में अक्सर दवाइयाँ और जीवनशैली में बदलाव काफी होते हैं। लेकिन अगर लक्षण हों या जाँच में खून का बहाव कमज़ोर हो, तो डॉक्टर स्टेंट की सलाह दे सकते हैं।
सवाल 3: एंजियोग्राफी के बाद कितने समय में फैसला करना चाहिए?
अगर लक्षण गंभीर हैं तो उसी दिन या अगले दिन फैसला होता है। अगर हालत स्थिर है तो एक हफ्ते के अंदर किसी अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ से मिलें। देर करना ठीक नहीं।
सवाल 4: जयपुर में एंजियोग्राफी के बाद स्टेंट का खर्च कितना होता है?
जयपुर के सरकारी अस्पतालों में एक स्टेंट पर लगभग 25,000 से 40,000 रुपये लग सकते हैं। निजी अस्पतालों में यह 80,000 से 1.5 लाख तक हो सकता है। चिरंजीवी योजना और आयुष्मान भारत में पंजीकृत मरीज़ इटर्नल हॉस्पिटल जयपुर में कैशलेस इलाज पा सकते हैं।
सवाल 5: क्या चिरंजीवी योजना में स्टेंट की प्रक्रिया कवर होती है?
हाँ। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट की प्रक्रिया शामिल है। इटर्नल हॉस्पिटल जयपुर इस योजना के तहत सूचीबद्ध है। अपना जन आधार कार्ड साथ लाएँ।
सवाल 6: बाईपास सर्जरी कब ज़रूरी होती है?
जब तीन या ज़्यादा मुख्य नसें बुरी तरह बंद हों और स्टेंट से काम न चले, तब बाईपास सर्जरी की सलाह दी जाती है। मधुमेह के मरीज़ों में कई बार बाईपास को स्टेंट से बेहतर माना जाता है।
सवाल 7: क्या ब्लॉकेज दवाइयों से कम हो सकती है?
ब्लॉकेज पूरी तरह गायब नहीं होती। लेकिन सही दवाइयाँ, परहेज़ और व्यायाम से जमाव को स्थिर किया जा सकता है। यह जमाव को टूटने से रोकता है और दिल के दौरे का खतरा कम करता है।
सवाल 8: डॉ. प्रेम रतन डेगावत से जयपुर में परामर्श कैसे लें?
इटर्नल हॉस्पिटल, जगतपुरा रोड, जयपुर में डॉ. डेगावत का OPD सोमवार से शनिवार सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलता है। अपॉइंटमेंट के लिए +91-9549158888 पर फोन करें। रिपोर्ट, ईसीजी और पिछली दवाइयाँ साथ लाएँ।
डिस्क्लेमर:
यह जानकारी केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी स्थिति के अनुसार सही परामर्श के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर या कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।









